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हरियाली अमावस्या विशेष:
हरियाली का करना हो दीदार तो पहुंचो ‘म्हारे मुकंदरा’
300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां, पेड़ों में छिपी प्राकृतिक आभा
बाघों ने लगाया सुंदरता में चार चांद, वन्यजीव बने आकर्षण का केंद्र
कोटा
यदि आपको वाकई में हरियाली का दीदार करना हो तो कहीं पर भी मत जाइएगा। बस! कोटा शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पहुंच जाइए। यहां हरियाली से ओतप्रोत पहाड़, दुर्लभ वन्यजीव, असंख्य औषधियां और बाघों की अठखेलियों के दृश्यों को देखकर रोमांचित हो जाओगे। हालांकि, इस बार बारिश अपेक्षाकृत कम होने से खल-खल करते हुए झरनों के दृश्य नहीं है। फिर भी पिछले दिनों हुई बारिश से यहां चहुंओर हरियाली की चादर छा गई है। यह हरियाली से आबाद हो चुका है। वन्य जीवों कुनबा बढ़ने से इसकी सुंदरता बढ़ गई है। टाइगर रिजर्व इस समय पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। इस वन क्षेत्र में एक दजर्न से अधिक तीर्थ स्थल है। जो धर्मावलंबियों के लिए आस्था केंद्र बने हुए है। 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी मौजूद है। उनका कलरव गूंजता रहता है, जिससे यहां का वातावरण अद्भुत नजर आ रहा है। इसके अलावा टाइगर आने से रोमांच कई गुना बढ़ चुका है। हालांकि, अभी उनके दर्शन दुर्लभ है। क्योंकि, इसके लिए करीब चार दीपावली तक इंतजार करना पड़ेगा।
इन वन्यजीवों की मौजूदगी
इस वनक्षेत्र में टाइगर, भालू, जरख, बघेरे, नीलगाय, जंगली लोमड़ी, सेही, बंदर लाल मुंह, बंदर काले मुंह, मरु बिल्ली, लोमड़ी, मरु लोमड़ी, भेडिया, बिज्जू, सियार गीदड़ व नेवला जैसे दुर्लभ प्राणी भी अपनी अठखेलियां करते हुए देखे जा सकते है। बीते कुछ सालों में नील गाय तथा हरिण का भी कुनबा बढ़ा है। इनकी तादाद बढ़ने से ये भी पूरे क्षेत्र में धमाचौकडी मचाते हुए नजर आते है। इसके अलावा दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां भी यहां मौजूद है। उनमें रेन क्यूलम, वाइट वर्स्टेड वाटर हेन, इंडियन अयोरा, गोल्डन आॅरिमोल, वूली नेक स्टार्क, कॉमन बर्डस, सोल्डर काइट तथा अन्य पक्षियों का कलरव गूंजायमान है।
औषधियां का खजाना यहां
मुकंदरा न केवल टाइगर रिजर्व के लिए प्रसिद्ध नहीं है बल्कि यहां दुर्लभ औषधियां भी मिलती है। आयुर्वेद चिकित्सकों को यहां पर 350 तरह की दुर्लभ औषधियां मिली हैं। अति दुर्लभ वनोषधियां में रक्त महाद्रोणी, महापिंडीतरु, वृक्षादनी, तवक्षिर, कंटकी पलाश, गजकर्णी, विशाला, रक्त अतिबला, श्वेत पलाश, कृष्ण चित्रक, श्वेत चूड़ामणी, भगलिंगी, वृहद् गोरखमुंडी, वृहद् कृष्णभृंगराज, श्वेत अपराजिता, केवुककंद, अर्कपुष्पी, कपित्थपत्री, श्वेत शरपूंखा, अत्यम्लपर्णी, लता कांचनार, ब्रह्मादंडी, हस्तीकर्णपलाश, सुगंधबाला, विष्णुकांता, गंधवृक्षक, जीवंती, कृष्णधतुर आदि हैं। इसके अलावा यहां पर शुष्क, पतझड़ी वन, पहाडियां, नदी, झरना, घाटियों के बीच पलाश, बरगद, पीपल, गुगल, सालर, अमलताश, खेजड़ी, बबूल, खैर, जामुनए बांस, धोंक, आंवले, नीम, खजूर और आम के वृक्ष मौजूद हैं।
प्राचीन सभ्यता के मिले अवशेष
मुकंदरा में हजारों साल पुरानी सभ्यता के अवशेष दबे पड़े है। पिछले कुछ सालों पूर्व आलनिया 50 हजार साल पुराने पाषाण कालिन हथियार भी मिले थे। जो इतिहासकारों तथा पुरावेताओं के लिए इतिहास को जानने का स्त्रोंत है। विद्यार्थियों तथा पर्यटकों के लिए भी पूरा क्षेत्र रूचिकर है। ऐसे में मुकंदरा अपने आप में अन्य स्थलों से रमणीक है।
ऐसा है मुकंदरा टाइगर रिजर्व
घोषित- 9 अप्रैल 2013
कुल क्षेत्रफल- 759.99 वर्ग किमी
कोर एरिया-417.17 वर्ग किमी
बफर एरिया-342 वर्ग किमी
टाइगर की संख्या- 6
पक्षियों की प्रजातियां- 300
दुर्लभ औषधियां- 300

इनका कहना है।
पिछले दिनों हुई बारिश से मुकंदरा हरा भरा हो चुका है। हालांकि, अभी झरनों और नदी-नालों में पानी की आवक नहीं हुई है। फिर भी यहां मनमोहक दृश्य हो गए है।
डॉ. टीमोहन राज, डीएफओ, मुकंदरा टाइगर रिजर्व, कोटा

hemraj

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