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सरकारी योजनाओं के तहत उपचार का निजी चिकित्सालयों को नहीं मिल रहा पैसा
जिला कलक्टर को दिया ज्ञापन, रूका हुआ पैसा दिलाने की मांग
सात दिन में रूका हुआ पैसा नहीं मिला तो सरकारी योजनाओं के तहत नहीं करेंगे उपचार
कोटा.
कोटा शहर के निजी चिकित्सालयों को लम्बे समय से सरकारी योजनाओं के तहत किए जा रहे उपचार व आॅपरेशन का पैसा नहीं मिल रहा है, जिस कारण चिकित्सकों ने मरीजों का निशुल्क उपचार करने में असहमति दर्ज कराई है। उन्होंने जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर अंशुमान भारत (एमजी-आरएसबीवाई) व भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का पैसा नहीं मिलने पर कार्य बंद करने की चेतावनी दी। आॅल प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन कोटा ने जिला कलक्टर ओम कसेरा से मुलाकात की और कहा कि पिछले सात माह और कई चिकित्सालयों को उससे भी अधिक समय से रूका हुआ पैसा नहीं मिला है। कई बार अवगत कराने के बाद भी सरकार इस और कोई ध्यान नहीं दे रही है। अस्पताल मरीजों का उपचार तो करना चाहते हैं, लेकिन लम्बे समय से पैसा नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। एसोसिएशन के सचिव डॉ. केके पारिक ने बताया कि कोटा में जितने भी चिकित्सालय सरकारी योजनाओं के तहत कार्य कर रहे हैं, उन सभी को रूका हुआ पैसा नहीं मिल रहा है, ऐसी स्थिति में इन योजनाओं के तहत अब निजी चिकित्सालय कार्य नहीं कर सकेंगे। यदि सात दिन में सरकार ने पैसा नहीं दिया तो निजी चिकित्सालयों को मजबूरन इन योजनाओं के तहत कार्य बंद करना होगा।

कोटा में 18 करोड से अधिक के केस किए रिजेक्ट
सचिव डॉ. पारिक ने बताया कि किसी निजी चिकित्सालय का एक करोड़ तो कुछ का उससे भी अधिक रिजेक्ट केस का बकाया है। दिसम्बर माह के बाद से निजी चिकित्सालयों को पैसा नहीं मिला है। कोटा शहर में 16 ऐसे निजी चिकित्साल हैं जिनका 18 करोड 73 लाख 93 हजार 588 रूपए अब तक बकाया है। इतना अधिक पैसा बकाया होने से कार्य करना मुश्किल हो गया है।

मरीजों को आएगी समस्या
निजी चिकित्सकों का कहना है कि वह मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार करना चाहते हैं, सरकार की योजनाओं के तहत हजारों मरीजों को निशुल्क उपचार मिल रहा था। लाखों रूपए के आॅपरेशन निर्धन व जरूरतमंदों के भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना व अन्य योजनाओं के तहत हो रहे थे। लेकिन निजी चिकित्सालय संचालकों के सामने अन्य डॉक्टर्स की फीस, नर्सिंग स्टॉफ व दवाओं के अपने पास से पैसा देने का संकट खड़ा हो गया है। कोरोना संक्रमण काल में ये समस्या और भी अधिक विकट हो गई है। यदि निजी अस्पताल संचालकों को शीघ्र ही पैसा नहीं दिया गया तो वह मरीजों का इन योजनाओं के तहत उपचार बंद कर देंगे, जिससे मरीजों को भारी समस्या उत्पन्न होगी।

hemraj

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