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मुकुन्दरा में बाघ एमटी-3 की मौत
पोस्टमार्टम कर राजकीय सम्मान में किया अंतिम संस्कार
 कार्डियक अटैक और फेफड़ों में संक्रमण बताया मौत का कारण
रणथंभौर से स्वयं मुकुन्दरा चलकर आया था बाघ
कोटा
हाडौती संभाग में गुरुवार को उस समय हर कोई स्तब्ध हो गए जब मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व से बाघ एमटी-3 की मौत की खबर मिली। लोगों का एकाएक विश्वास नहीं हुआ।  बाद में अधिकारियों ने इसकी पुष्टी की। बाघ ने अलसुबह 6 बजे घाटी जागीर के पास दम तोड दिया था। मौत के बाद दोपहर के समय डॉक्टरर्स की टीम ने दर्रा में पोस्टमार्टम कर किया। अधिकारियों की मौजूदगी में बाघ का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार भी कर दिया। डॉक्टरर्स की टीम ने मौत का कारण फेफड़ों में संक्रमण बताया है। संक्रमण के चलते कार्डियक अटैक आया है। स्वांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। कुछ दिनों से लंगड़ाकर चल रहा था। शरीर में कोई घाव नही होने से स्पष्ट नही हो पा रहा था। चार दिन पहले नीलगाय का शिकार भी करना बता रहे थे। उसका पूरा भक्षण नही किया था। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का   खुलाशा होगा। अधिकारियों ने बताया कि एक दो दिन से अधिक अस्वस्थ होने से रणथंभौर से बुधवार को डॉक्टर राजीव गर्ग को बुलाया था। उपचार के लिए गुरूवार को इसको टेÑंकुलाइज करना था, लेकिन सुबह ही दम तोड दिया। वनकर्मियों ने सुबह मौत के बाद सूचना आलाधिकारियों को दी। इसके बाद दर्रा में पोस्टमार्टम कर दिया। पोस्टमार्टम के दौरान मुकंदरा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आनंद मोहन, टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक डॉ टीमोहन राज, एसीएफ राजेश शर्मा और रामगंज मंडी के उपखंड मजिस्ट्रेट चिमनलाल मीना समेत बड़ी संख्या में वन्यजीव पे्रमी मौजूद रहे।
स्वत: चलकर आने वाला बाघ
एमटी-3 बाघ रणथंभौर की बाघिन टी-60 का बेटा था। टाइगर रिजर्व में पहला बाघ था, जो स्वत: रणथंभौर से चलकर टाइगर रिजर्व में पहुंचा था। यहां आने से पहले बूंदी जिले में देखा गया था। इसके बाद चंबल नदी को पार करते हुए कोटा जिले के सुलतानपुर पहुंचा था। करीब एक माह रूकने के बाद कनवास होते हुए मुकंदरा टाइगर रिजर्व में 9 फरवरी को पहुंचा था। इस दौरान इसने करीब 150 किलोमीटर का सफर तय किया था। मुकंदरा में लगे कैमरों इसकी फोटो देखकर सभी हैरान हो गए। बाद में इसकी पुष्टी-98 के रूप में हुई। अधिकारियों ने इसका नामकरण एमटी-3 कर खुले क्षेत्र में रीलिज कर दिया था। बाद में इसका घर बसाने के लिए रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघिन लेकर आए थे।
प्यार के लिए पहुंचा मुकंदरा
बाघ एमटी-3 की मुकंदरा आने की कहानी बड़ी रोचक है। अधिकारी बताते है कि यह बाघिन एमटी-2 से प्रेम करता था। एमटी-2 रणथंभौर से लाई गई थी। सभी इसको लेकर हैरान थे कि बाघ रणथंभौर से चलकर सीधा मुकुंदरा हिल्स ही क्यों पहुंचा। वहां भी सीधा एमटी-2 के एनक्लोजर के सामने की जाकर ही क्यों रुका। जबकि, एमटी-2 को भी तब कुछ दिन पहले ही रणथंभौर से मुकुंदरा शिफ्ट किया गया था। पड़ताल में पता चला कि एमटी-2 और एमटी-3 रणथंभौर में टी-106 और टी-98 के नाम से जाने जाते थे। दोनों का मूवमेंट एक ही इलाके में था। दोनों अक्सर साथ-साथ विचरण करते थे। एक दिन अचानक जब वहां से विभाग की टीम बाघिन टी-106 को मुकुंदरा हिल्स ले गयी तो तब से टी-98 भी काफी नाराज हो गया था। एक महिला पर हमले में भी उसका नाम भी आया था। तब ये बाघ अचानक रणथंभौर से गायब हो गया और फिर कुछ दिन बाद सीधा मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में एमटी-2 के एनक्लोजर पास नजर आया। अधिकारियों का लगा कि दोनों आपस में भिड सकते है। बाद में पूरी हिस्ट्री खुली। बाघों का इससे पहले इस तरह का बर्ताव नहीं देखा गया था न ही इस बर्ताव को लेकर कोई प्रमाणित थ्योरी दी गयी थी, लेकिन ये सबको पता था कि बाघिन टी-106 का ये बाघ दीवाना था। 
मातम में बदली खुशियां
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पिछले दिनों हार्ड एनक्लोजर में विचरण कर रही बाघिन एमटी-2 से दो शावक पैदा हुए थे। रिजर्व में टाइगर का कुनबा बढ़ने से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर थी, लेकिन डेढ़ माह बाद बाघ-एमटी-3 ने सारी खुशियां मातम में बदल गई। अब टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या घटघर 5 रह गई। इसमें दो शावक भी है। पहले बाघिन एमटी-4 द्वारा भी शावक देने की खबरें आ रही थी, लेकिन अभी तक पुष्टी नहीं की गई। टाइगर रिजर्व में असमय जवान बाघ की मौत होना सभी को हिलाकर रख दिया है। 
पहले भी हो चुकी बाघ की मौत
टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत की पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी मौत हो चुकी है।  2003 में भी एक टाइगर ब्रोकन टेल रणथम्भौर से निकल कर इसी जंगल में आ गया था, लेकिन यहां ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद 2010 में भी टी-35 बाघिन कोटा जिले के सुलतानपुर के जंगलों में पहुंच गई थी। करीब छह साल तक वहां पर रूकने के बाद मौत हो गई थी। रणथंभौर से 16 साल बाद स्वयं चलकर मुकंदरा में आने वाला बाघ था। बाघ अत्यंत सुदंर था। इसने इन सालों में किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया था। यह अक्सर घाटी गांव के आस-पास विचरण करता था। मानव आबादी से दूर रहना इसे पसंद था।
बड़ी संख्या में पहुंचे वन्यजीव प्रेमी
बाघ की मौत के बाद बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पहुंच गए। इनमें मुकंदरा टाइगर रिजर्व की सलाहकार समिति के निखिलेश सेठी, एएच जैदी, तपेश्वर सिंह भाटी, जल बिरादरी के बृजेश विजयवर्गीय, पगमार्क फाउंडेशन से देवव्रत सिंह हाडा, अर्पित मेहरा, डॉ सुधीर गुप्ता, वन्यजीव प्रेमी बनवारी यदुवंशी, उर्वशी शर्मा समेत बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। युवा बाघ की मौत देखकर उनकी आंखों से आंसू निकल आए। सभी ने एमटी-3 को श्रद्धांजलि दी। लोगों ने असमय मौत को लेकर विभाग पर सवाल भी उठाए।
बाघ छोड गया सवाल
सवाल-1. 
बाघ करीब चार दिनों से बीमार था। इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई। यहां तक मुकंदरा सलाहकार समिति के सदस्यों को भी इसके बारे में नहीं बताया। जबकि, अधिकारियों को इसकी पूर्व में जानकारी मिल गई थी।
सवाल-2.
शव का पोस्टमार्टम में इतनी जल्द बाजी क्यों की। सलाहकार समिति से जुडेÞ लोगों के पहुंचने से पूर्व पोस्टमार्टम कर दिया। उन्होंने शव तक को नहीं देखा।
सवाल-3.
डॉक्टर्स की टीम का कहना है कि फेफडों में संक्रमण फैल गया था। लंग्स में पानी भर गया था। चार दिनों से स्थिति खराब थी। फिर भी ऐसी अवस्था में भी शिकार कर उसका भक्षण कैसे कर लिया।
सवाल-4.
मौत के समय में विरोधभास नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बाघ ने सुबह 7 बजे दम तोड दिया था। जबकि, मॉनीटरिंग कर रहे वनकर्मियों का कहना था कि 5.50 पर मरा था।
सवाल-5.
अधिकारियों का कहना था कि बाघ गुरूवार सुबह 6 बजे मरा है। जबकि, एक्सपर्ट का कहना है कि शव का देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इसकी मौत दो तीन पूर्व हो चुकी है।
सवाल-6.
शव का पोस्टमार्टम स्थानीय डॉक्टर्स डॉ अखिलेश पांडे, डॉ तेजेंद्र रियाड तथा एक रणथंभौर के डॉक्टर डॉ राजीव गर्ग से करवाया गया। जबकि, ऐसे संदेहास्पद मामलों में उच्चस्तरीय टीम पोस्टमार्टम करनी थी।
सवाल-7.
डॉक्टर्स और अधिकारियों का कहना है कि बाघ की मौत फेफडों में संक्रमण के कारण हुई है। इसके शरीर पर किसी प्रकार का घाव नहीं था। जबकि, ग्रामीणों का कहना है कि बाघ को पत्थर मारने से चोट लग गई थी।
जांच की मांग
वन्यजीव प्रेमियों ने बाघ की मौत संदिग्ध माना है। स्थानीय सलाहकार समिति के सदस्य निखिलेश सेठी और जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय ने उच्च स्तरीय कमेटी से जांच की मांग की है। उनका कहना था कि मुकंदरा प्रशासन ने काफी कुछ छिपाया है। स्थानीय लोगों से कोई तालमेल नहीं बिठाया। इसका नतीजा सभी के सामने है। इसी प्रकार पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष  देवव्रत सिंह हाड़ा और अर्पित मेहरा ने वन मंत्री को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ऐसा था बाघ
मुकंदरा में आया-9 फरवरी 2019
मौत- 23 जुलाई 2020
समय- सुबह 6:00 बजे
वजन-193 किलोग्राम
उम्र- 4 साल 6 माह
लंबाई-190 सेमी
पूंछ की लबाई-94 सेमी
ऊंचाई-125 सेमी
इनका कहना है।
खबर बहुत दु:खद है। इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है। तमाम अधिकारी और डॉक्टर्स मौके पर है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हो पाएगा।
सुखराम विश्नोई, वन एवं पर्यावरण मंत्री, राजस्थान सरकार
 
घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। बाघ तीन-चार दिन से बीमार था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
अरिंदम तोमर, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक
hemraj

मत करिए इंतजार, पहुंच जाइए चम्बल के पार, होंगे ऊदबिलाव के दीदार

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