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चंबल में ऊदबिलाव की अठखेलियां…
मनमोहक नजारों को देखने के लिए पहुंच रहे वन्यजीव प्रेमी
दोनों स्ट्रीम में तीन दर्जन से अधिक मौजूद, लुप्त प्रजाति की श्रेणी में शामिल
कोटा
क्या आपने कभी जल मानुष देखे है? जवाब में उतर ना है तो चिंता मत कीजिए। सीधे चले जाए चंबल की कराइयों के बीच। जहां आपको जल मानुष देखने को जाएंगे। यंू तो ये प्रदेश भर में लुप्त है, लेकिन यहां पर दर्जनों की संख्या में अपने शावकों के साथ अठखेलियां करते हुए नजर आ जाएंगे। सदानीरा चंबल में इनके मनमोहन नजारे देखते ही बन रहे है। गर्मी और उमस के बीच नदी के तटों पर धूप सेंकते हुए नजर आ जाते है। मछली पर झपट मार कर पकड़ना ऐसे दृश्य जो अब यहां आम हो चुके है। इस समय इनके मनमोहक नजारों को देखने बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी पहुंच रहे है। ऐसे दृश्यों को कैद करने से नहीं रोक पा रहे है। इन पर शोध करने वाले शोधार्थियों का कहना है कि चंबल की दोनों स्ट्रीम में तीन दर्जन से अधिक ऊदबिलाव है। पिछले साल तो बाढ़ के दौरान इधर-उधर हो गए थे। अब यह खुलकर नजर आ रहे है। इनको अपनी फैमिली के साथ देखा जा रहा है। उनका कहना है कि अभी इनको आराम से देखा जा सकता है। नदी में पानी आने के बाद ये नजर नहीं आएंगे।
चंबल में पाए जाते है ऊदबिलाव
शोधार्थियों का कहना है कि प्रदेश में अनेक नदियां है, लेकिन एकमात्र चंबल नदी में इनकी मौजूदगी देखी जा सकती है। इसका कारण इसका पानी स्वच्छ होना है। स्वच्छ पानी में ये रहना पसंद करते है। साथ ही यहां कुछ क्षेत्रों में आखेट पर भी प्रतिबंध है। ऐसे में इनको खतरा कम है। मुकंदरा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार चंबल के अप स्ट्रीम तथा डाउन स्ट्रीम में उदबिलाव की संख्या 38 है। दोनों स्ट्रीम में इनकी 4-4 फैमिली मौजूद है।
ऐसा होता है ऊदबिलाव
ऊदबिलाव बहुत शर्मीले स्वभाव का जलीय जानवर है। लोगों से दूरी बनाकर रहना पसंद करता है। यह जल और स्थल पर वास करने वाला स्तनधारी जानवर है, जो कि मांसाहारी प्राणी है। इनकी लंबाई 0.6 से 1.8 मीटर और वजन 1 से 45 किलो के बीच होता। ऊदबिलाव बेहद ठंडे पानी में भी रह सकते हैं। इससे खाना पचकर ऊर्जा बनती रहती है। अपना अधिक समय पानी में ही बिताता है। शरीर लंबा, टांगें छोटी, सर चपटा और थूथन चौड़ा होता है। इसकी आंखें छोटी, मूंछे घनी और कान छोटे तथा गोलाकार होते हैं। पानी में घेरा डालकर मछलियों का शिकार करते हैं। इनका मुख्य भोजन तो मछली ही है, लेकिन पानी की चिड़ियां छोटे जानवर और कीड़े मकोड़ों से भी अपना पेट भरते हैं। मादा अपने बिल में मार्च-अप्रैल में दो तीन शावक को जन्म देती है।
मछलियों पर करता नियंत्रण
उदबिलाव जलीय जीवों में बहुत जरूरी है। मच्छलियों की बढ़ती तादाद पर नियंत्रण करता है। इससे पानी में इनका संतुलन बना रहता है, लेकिन इनकी संख्या दिनों दिन कम हो रही है। ये चिंता का बड़ा कारण है। हालांकि, वन्य जीव विभाग इनका संरक्षण देने की बात करता है। राज्य सरकार ने तो इसको कोटा जिले का शुभंकर घोषित किया हुआ है। यह शेड्यल-1 प्रजाति में शामिल है।अंतरराष्टÑीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयूसीएन) ने इसे लुप्त प्रजाति की श्रेणी में रखा है। इनकी घटती तादाद चिंता का विषय है।
विशेषताएं
प्रजाति- शेड्यूल-1
लंबाई- 0.6 से 1.8 मीटर
वजन- 1 से 45 किलोग्राम
भोजन- मांसाहारी
इनका कहना है
चंबल नदी के तटों पर इनको बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। रावतभाटा के पास विजिट के दौरान देखा था। यह फैमिली के साथ अठखेलियां कर रहे थे।
हर्षित शर्मा, रिसर्च स्कॉलर,

ऊदबिलाव शेड््यूल-1 का जीव है। यूं तो एक मात्र चंबल नदी में मिलता है, लेकिन पिछली बार रणथंभौर में देखा गया था। चंबल नदी में तीन-चार स्थानों पर देखे जा सकते है।
डॉ कृष्णेंद्र सिंह नामा, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट, कोटा

विभाग द्वारा इनकी निरंतर मॉनीटरिंग की जाती है। इसके कारण संख्या में इजाफा हो रहा है। नदी में आखेट पर भी प्रतिबंध है। पिछले दिनों कार्रवाई की गई थी।
आरएस भंडारी, एसीएफ, मुकुंदरा टाइगर रिजर्व, कोटा

hemraj

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