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ये कोटा में बड़े संकट की आहट है। काेविड अस्पतालाें में पिछले 3 दिन से नए मरीजाें काे भर्ती करना बंद किया हुआ है। प्राइवेट हाॅस्पिटल ही नहीं, सरकारी अस्पताल ने भी नए राेगी भर्ती करने से हाथ खड़े कर रखे हैं। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि तीन दिन से पूरा प्रशासनिक तंत्र इस स्थिति काे मूकदर्शक बनकर देख रहा है।

गंभीर मरीजों को दो टूक जवाब दिया जा रहा है कि ऑक्सीजन नहीं है। भास्कर ने पड़ताल की ताे सामने आया कि बुधवार काे नए अस्पताल की ओपीडी में ही 5 मरीजाें ने दम ताेड़ दिया, हालांकि अस्पताल प्रबंधन इसे नकार रहा है, क्याेंकि ये माैतें रिकाॅर्ड में नहीं हैं। न ही इनका अस्पताल में काेई रिकाॅर्ड, क्याेंकि इन्हें एडमिट ही नहीं किया गया।

जीरियाट्रिक ओपीडी में दिनभर स्ट्रेचर पर मरीज लेटे हुए नजर आते हैं, यहीं उन्हें उपलब्ध हाेने पर ऑक्सीजन सिलेंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है। भर्ती याेग्य मरीजाें के परिजन सुबह से शाम तक अस्पतालाें के चक्कर लगा रहे हैं, हाथ जाेड़ रहे हैं, गिड़गिड़ा रहे हैं… लेकिन बेड नहीं मिल रहा।

अब सवाल है कि क्या इस स्थिति काे यूं ही देखते रहना ठीक है? और किसे पता कि यह हाल कब तक रहेंगे? ऐसे में नए मरीजाें काे जैसे मरने के लिए छाेड़ दिया गया है? मरीजाें काे ऑफिशियल ताैर पर यह कहा जाता है कि वे जयपुर चले जाएं, लेकिन वहां के अस्पतालाें में भी बेड की मारामारी है। वहीं एसएसबी ब्लाॅक में बुधवार देर रात हंगामा हाे गया। रात काे ऑक्सीजन का प्रेशर कम हाेते ही अलार्म बजे ताे एक महिला की तबीयत बिगड़ने लगी।

उसके परिजन एक सिलेंडर लेकर आ गए, लेकिन वहां ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने काेई नहीं आ रहा था। इस पर महिला के परिजनाें ने हंगामा कर दिया। पुलिस ने मामला शांत कराया। काेटा में गुरुवार काे 1126 पाॅजिटिव आए। छह राेगियाें की माैत हुई। अब काेटा में एक्टिव केस बढ़कर 8518 हाे गए हैं। रेलवे के 30 और वन मंडल के तीन कर्मचारी पॉजिटिव मिले हैं।
प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी ऑक्सीजन का संकट, कई अस्पतालाें में कुछ ही घंटे का बैकअप बचा

अब प्राइवेट हॉस्पिटलों की ऑक्सीजन क्षमता भी जवाब देने लगी है। प्राइवेट हॉस्पिटलों में गुरुवार को दिनभर ऑक्सीजन को लेकर हाहाकार मचा रहा। दोपहर बाद जब लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक आया, तब डॉक्टरों की जान में जान आई। दो दिन से प्राइवेट हॉस्पिटलों को भी ऑक्सीजन सप्लाई नेक टू नेक मिल रही थी, ऐसे में बैकअप खत्म हो गया और बुधवार रात से ही ऑक्सीजन संकट शुरू हो गया। रात को जायसवाल हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की किल्लत हुई तो हड़कंप मच गया।

अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति से कलेक्टर को अवगत कराया और रात को ऑटो लगाकर दोनों प्लांट्स से कई बार ऑक्सीजन मंगवाई गई। वहीं, गुरुवार दोपहर में पारीक हॉस्पिटल में सिर्फ एक घंटे की ऑक्सीजन बची तो प्रबंधन ने प्रशासन समेत जनप्रतिनिधियों को अवगत करा दिया। बाद में जब सप्लाई मिली तो हालात सामान्य हुए। सुधा हॉस्पिटल में भी बैकअप खत्म है, इस हॉस्पिटल की दोनों ब्रांचों में करीब 140 पेशेंट एडमिट हैं। इस संकट के बाद गुरुवार शाम आईएमए के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मिलकर विस्तृत बात की।

सांसें बचाने की जद्दोजहद

डीसीएम रोड स्थित प्लांट से ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाता युवक।

निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत दूर नहीं की गई तो गंभीर हो सकते हैं हालात : डॉ. जायसवाल
आईएमए जिलाध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कलेक्टर को बताया कि निजी चिकित्सालय में ऑक्सीजन की खपत सामान्य से काफी ज्यादा हो रही है एवं सभी निजी चिकित्सकों को स्थानीय आपूर्तिकर्ता से अत्यधिक मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है। बेड्स और ऑक्सीजन की भारी कमी है।

डॉ. जायसवाल ने बताया कि लगभग सभी निजी अस्पतालों में आईसीयू बेड एवं ऑक्सीजन बेड्स भर गए हैं। डॉ. जायसवाल ने कहा कि ऑक्सीजन आपूर्ति की समुचित व्यवस्था कराई जाए, ताकि होने वाले गंभीर परिणामों से बचा जा सके। प्रतिनिधिमंडल में आईएमए प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक शारदा, जिला सचिव डॉ. अमित व्यास, डॉ. राकेश जिंदल, डॉ. राहुल अरोडा, डॉ. दिनेश गुप्ता आदि थे।

  • स्थितियां बेहद विकट हैं। दिनभर हमारे पास यही फोन आते हैं कि पेशेंट एडमिट कर लो, लेकिन कुछ नहीं कर पा रहे। ऐसी लाचारी हम लोगों के साथ भी पहले कभी नहीं हुई। लेकिन समस्या ऑक्सीजन की है, मरीज को रख भी लें तो उसे ऑक्सीजन कहां से दें? क्योंकि जो पहले से एडमिट है, उनके लिए ही मैनेज नहीं कर पा रहे। – डाॅ. अशोक शारदा, स्टेट प्रेसीडेंट आईएमए, निदेशक मैत्री हॉस्पिटल
  • मना करने के बावजूद कई लोग अपने मरीजों को लेकर अस्पताल तक आ जाते हैं। बेचारे तड़पते रहते हैं। क्या करें? आज ही हमारे यहां ऑक्सीजन खत्म होने की स्थिति आ गई थी। संकट बेड्स का नहीं, ऑक्सीजन का है। बेड्स तो अस्पताल की गैलरियों में भी लगा देंगे, लेकिन ऑक्सीजन तो हो। इस वक्त हर मरीज को ऑक्सीजन रिक्वायरमेंट हो रही है। – डाॅ. केके पारीक, निदेशक, पारीक हॉस्पिटल

    गुड न्यूज

    कोटा को मिली 11 टन लिक्विड ऑक्सीजन
    भारी संकट के बीच गुरुवार दोपहर में कोटा को 11 टन लिक्विड ऑक्सीजन मिल पाई। सहायक औषधि नियंत्रक प्रहलाद मीणा ने बताया कि 16 टन लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक आया था, जिसमें से 11 टन कोटा व 5 टन झालावाड़ जिले को आवंटित की गई। यहां टैंक से 11 टन खाली कराने के बाद उसे झालावाड़ भेज दिया गया।

    बैकअप ऑक्सीजन हाेने के बाद ही शुरू कर पाएंगे नए रोगियों के एडमिशन
    मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल डाॅ. विजय सरदाना ने बताया कि गुरुवार को ऑक्सीजन की स्थिति थाेड़ी नाॅर्मल हुई है। एक लिक्विड ऑक्सीजन टैंक भी आ गया है। लेकिन अभी भी नए मरीज एडमिट नहीं कर पा रहे, क्याेंकि बैकअप बिल्कुल नहीं है। हम प्रयास कर रहे हैं कि शुक्रवार तक हमारे पास कुछ भरे हुए सिलेंडराें का बैकअप हाे जाए, इसके बाद नए मरीज एडमिट करना शुरू कर देंगे। स्थिति हम भी समझ रहे हैं और दुखी भी हैं, लेकिन पहले से भर्ती 500 से ज्यादा मरीजाें काे भी हमें देखना हाेगा।

    • हम प्रयास कर रहे हैं कि अब कम ऑक्सीजन रिक्वायरमेंट वाले मरीजाें काे एडमिट करना शुरू करा दें, लेकिन ज्यादा ऑक्सीजन रिक्वायरमेंट वाले मरीजाें काे अभी एडमिट नहीं कर पाएंगे। क्याेंकि ऐसे एक मरीज काे ही दिनभर में बहुत ज्यादा ऑक्सीजन की डिमांड हाेती है, जाे आज की स्थिति में हमारे पास नहीं है। संभवत: मंगलवार तक हमें 100 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी मिल जाएंगे, जिससे कम ऑक्सीजन रिक्वायरमेंट वाले मरीजाें की समस्या ताे दूर हाे जाएगी। बाकी हालात सभी के सामने हैं। – उज्ज्वल राठाैड़, कलेक्टर

    रेलवे के 3 कर्मचारियों की मौत, 30 नए कोरोना पॉजिटिव मिले

    रेलवे में कोरोना से 3 व्यक्तियाें की मौत हुई है, इनमें दो रेलवे वर्कशॉप के कर्मचारी बताए गए हैं। एक व्यक्ति रेलवे से सेवानिवृत्त है। रेलवे के 30 नए कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव आए हैं। रेलवे के सीनियर डीसीएम अजय कुमार पाल ने बताया कि रेलवे अस्पताल में जिला प्रशासन ने 40 बेड अधिकृत किए हैं, जिसमें गुरुवार को शाम तक 38 बेड पर मरीज थे।

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