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प्रदेश में हाड़ौती अव्वल, जहां तीन जिलों में घूम रहे टाइगर
 मुकंदरा के कोटा, झालावाड़ और बूंदी के रामगढ़ में विचरण
टाइगर की संख्या बढ़ने से देश दुनिया में फैलेगा नाम
कोटा
कोटा संभाग को कोटा स्टोन और कोटा कचोरी के नाम से नही जानेंगे बल्कि इसको टाइगर्स की हाड़ौती के नाम से भी जाना जाएगा। वजह साफ है कि यहां टाइगर की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है। कोटा संभाग प्रदेश में प्रथम है, जहां चार में से तीन जिलों में टाइगर्स का मूवमेंट है। इस समय मुकंदरा टाइगर रिजर्व के झालावाड़ में एमटी-3 और कोटा जिले विस्तारित मुकंदरा में एमटी-1, एमटी-2 और एमटी-4 विचरण कर रही है। इनके साथ एमटी-2 के शावक भी है। इन्होंने हाल ही में जन्म लिया था। जबकि, बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में टी-115 घूम रहा है। इसने पिछले दिनों 29 जून को अभयारण्य में एंट्री की थी। अब हाड़ौती के बारां जिले को छोड़कर सभी जिलों में टाइगर आ चुके है। हालांकि, बारां जिले के शाहाबाद में भी टाइगर रिलीज किए जाने की बात कही थी, लेकिन वहां पर अभी रिलीज नही किया गया। बारां में टाइगर आ जाता है तो शायद देश का पहला संभाग हो जाएगा, जहां पर सभी जिलों में टाइगर हो जाएंगे।
अलवर और सवाईमाधापुर में भी टाइगर
्रप्रदेश में चार टाइगर रिजर्व है। इनमें रामगढ़ बूंदी और मुकंदरा कोटा, झालावाड़, बूंदी और चित्तौड़ तक फैला है। इन दोनों टाइगर रिजर्व में टाइगर आ चुके है। इसके अलावा सरिस्का अलवर और रणथंभौर सवाईमाधोपुर में भी टाइगर है। 
सरिस्का टाइगर रिजर्व केवल अलवर जिले में फैला हुआ है। यहां पर करीब 20 के आस-पास टाइगर है। जबकि,  रणथंभौर सवाईमाधोपुर और करौली में फैला हुआ है। यहां पर 70 से अधिक टाइगर है। रामगढ़ को हाल ही में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। जबकि, अन्य टाइगर रिजर्व पहले घोषित कर दिए थे। अब प्रदेश के अन्य जिलों में टाइगर रीलिज किए जाने की बात कही जा रही है।
बाघों से बढ़ेगा पर्यटन, मिलेगा रोजगार
हाड़ौती में बाघों के आगमन के बाद पर्यटन बढ़ेगा। इससे संबंधित इंडस्ट्री विकसित हो जाएंगे। इस क्षेत्र में होटल, व्यवसाय का कारोबार तेजी से फलीभूत होगा। इनमें स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। सबसे खास लाभ जंगलों को होगा। क्योंकि, हाड़ौती के जंगलों में पेड़ों की निरंतर कटाई हो रही है। बाघों के आने से जंगल सुरक्षित हो जाएंगे। ऐसा हुआ भी है। मुकंदरा में बाघ रीलिज किए जाने के बाद जंगल सुरक्षित हो गए है। इनका विस्तार बीते कुछ सालों में निरंतर बढ़ा है। यह हाड़ौती के लिए शुभ संकेत है।
इनका कहना है।
हाड़ौती में बाघों का कुनबा बढ़ना शुभ संकेत है। इससे पर्यटन के द्वार खुलेंगे। होटल, इंडस्ट्री विकसित होगी। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
 ए.एच. जैदी, नेचर प्रमोटर,
 
जंगल और जमीन सुरक्षित करने का एकमात्र तरीका है। दोनों टाइगर रिजर्व में और भी बाघ आ सकते है। इनकी संख्या बढ़ना हाड़ौती के लिए अच्छी बात है।
तपेश्वर सिंह भाटी, अध्यक्ष, मुकंदरा वन्य जीव समिति, कोटा
 
कोटा संभाग प्रदेश का  प्रथम है, जहां बारां जिले को छोड़कर सभी जिलों में टाइगर है। हमारा पर्यास यही है कि हाड़ौती को पूरे देश में जाने।
डॉ. टी. मोहन राज, डीएफओ, मुकंदरा टाइगर रिजर्व, कोटा
 
hemraj

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