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पहेली बनी एमटी-2 बाघिन की मौत
एमटी-1 पूरी तरह स्वस्थ होने से बना राज
पूर्व में बाघ से टकराव की बता रहे थे वजह
कोटा.
मुकुन्दरा टाइगर रिज़र्व में बाघिन एमटी-2 की मौत अभी भी पहेली बनी हुई है। इसकी वजह बाघ एमटी-1 का पूरी तरह से स्वस्थ होना है। क्योंकि, बाघिन की मौत के बाद डॉक्टर्स और अधिकारी बाघ बाघिन में टकराव होने की बात कह रहे थे, लेकिन मौत के दो दिन बाद बाघ पूरी तरह से स्वस्थ दिखा। ऐसे में एक्सपर्ट बाघ और बाघिन की भिड़ंत पर सवाल खड़े कर रहे है। एक्सपर्ट का कहना है कि दोनों के बीच आपस में टकराव हुआ होता तो बाघ कैसे स्वस्थ है। उसके शरीर पर खरोंच तक नही है। जबकि, बाघिन का पूरा चेहरा गायब था। यहां तक शरीर पर गहरे घाव होने से संक्रमण फैल गया था। बाघों की भिड़ंत में एक का मर जाना और दूसरे को चोट नही आना संदेह पैदा कर रहा है। उनका कहना है कि बाघ ने प्रहार किए होंगे तो जवाब में बाघिन ने बचाव किया होगा। ऐसे में बाघ को कुछ चोट पहुंचनी थी। इस मौसम में चोट उभरक सामने आ जाती। इसलिए बाघिन की मौत सवाल खड़ा कर रही है।
शावक का नही मिलना भी संदेह
टाइगर रिज़र्व के 82 वर्ग किलोमीटर में हार्ड एनक्लोजर निर्मित है। यानिकि, करीब 8 हजार हैक्टेयर का जंगल। ये जंगल विभाग के लिए बड़ा नही है। क्योंकि, उनके पर्याप्त संसाधन है। कैमरे है। ड्रोन है। पूरी मॉनिटरिंग टीम है। इसके बाद भी शावक नही मिलना चिंता की बात है। ये घटना भी संदेह पैदा करती है। लोगों का कहना है कि ऐसा नही हो शिकारी हार्ड एनक्लोजर में इंटर कर गए हो। उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया हो। शावक का कुछ भी सुराग नही मिलना बड़ा संदेह का कारण है।
आज नही हुई बाघों की साइटिंग
रिज़र्व में मंगलवार को दोनों बाघों की साइटिंग नही हुई है। हालांकि, एमटी-1 के पगमार्क मिले है। जबकि, एमटी-4 बाघिन के पगमार्क नही मिले है। अधिकारियों ने बताया कि टीम लगातार इनको ट्रैक करने की कोशिश कर रही है।
इधर, शावक की हालत में सुधार
चिड़िया घर में बाघिन एमटी-2 के शावक का उपचार लगातार जारी है। अब इसकी हालत में पूर्व की अपेक्षा सुधार है। उपचार कर रहे डॉक्टर तेजेंद्र रियाड़ का कहना है कि शावक की स्थिति में सुधार है। हालांकि, अभी भी खतरे से बाहर नही है। पूरी टीम इसकी देखरेख में लगी हुई है। जयपुर के वरिष्ठ चिकित्सकों से भी सलाह ली जा रही है।
इनका कहना है।
बाघ और बाघिन में टकराव होने की बात कही जा रही थी, लेकिन बाघ तो पूरी तरह से स्वस्थ है। ऐसे कैसे संभव है। इतनी बड़ी भिड़ंत में बाघ को एक खरोंच तक नही लगी।
तपेश्वर भाटी, अध्यक्ष, वन्यजीव समिति, कोटा

नर बाघ की रिकवरी रेट बहुत तेज होती है। इस कारण इसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आया है।
सेडूराम यादव, फीड डायरेक्टर, मुकुन्दरा टाइगर रिज़र्व,

hemraj

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