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दिया गायत्री परिवार आपदा प्रबंधन वाहिनी ने श्रमिकों को गन्तव्य तक पहुंचाने में की मदद

कोटा

 

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए लगाया गया लॉकडाउन खासकर प्रवासी श्रमिकों के लिए कहर बन गया है। गरीबी, बेबसी और गृहग्राम पहुंचने के लिए मजदूरों ने हर संभव प्रयास किया है। लॉक डाउन निरंतर बढ़ने और कोरोना संक्रमण से भयभीत प्रवासी श्रमिक जैसे-तैसे करके अपने परिजनों के बीच पहुंचना चाहते हैं। उद्योग धंधे बंद होने की वजह से दो वक्त के खाने का भी इंतजाम नहीं हो रहा। रेल, बस सहित यातायात के सभी साधन बंद हो जाने से इनके समक्ष उत्पन्न भुखमरी की स्थिति ने विकराल रूप ले लिया है। इससे निजात पाने के लिए श्रमिक पैदल ही सैकड़ों और हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं।इस भीषण गर्मी में अपने-अपने गृह राज्य और जिले की ओर लौट रहे श्रमिकों को अनेक यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ऐसा ही केडवाड़ा से 3 दिन पूर्व उदयपुर के लिए पैदल रवाना हुए मजदूरों की एक परिवार के साथ हुआ । एक ट्रक चालक उदयपुर के बदले उन्हें सिरोही के गोयली चौराहे पर छोड़कर रवाना हो गया। मध्यप्रदेश के सतना जिले के बंडी गांव निवासी हजारी कॉल ने बताया कि वह राजस्थान के केडवाड़ा गांव में ईंट भट्टे पर मजदूरी का कार्य करता है। उसके साथ तीन भाई व उनकी पत्नी तथा तीन बच्चे कुल 11 लोग है। तीन दिन पूर्व वह केडवाड़ा से सतना के बंडी गांव के लिए पैदल ही रवाना हो गया था। रास्ते में उन्हें ट्रक मिला जिसने उन्हें उदयपुर छोड़ने के लिए कह कर उन्हें निशुल्क ही ट्रक में बिठा लिया। परंतु रास्ते मे गुरुवार रात करीब 12:00 बजे के बाद बताया कि उसे बाड़मेर जाना है । यह कहकर उन्हें सिरोही के पास गोयली रोड उतार दिया। रात को वे किसी तरह गोयली चौराहा पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने भी पैदल आने वालों के लिए हर संभव सहायता के निर्देश दिए हैं इसके बावजूद लोग परेशान हो रहे हैं उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्तर पर कोई सहायता नहीं की गई।
सुबह गायत्री परिवार के कुछ लोगो ने उनको देखा फिर उनके लिए चाय नाश्ता कीव्यवस्था की । तत्पश्चात प्रशासनिक मदद न मिलने पर गायत्री परिवार ने पीड़ित मानवता की सेवा के लिए अनुकरणीय कदम उठाया, और गायत्री परिवार दिया के भाइयों की टीम ने आपदा प्रबंधन वाहिनी टीम से आपस मे संपर्क किया। और उन सभी मज़दूर परिवार को गायत्री परिवार सिरोही ने उन्हें खाना खिलाया और गन्तव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की ।उन सभी को अपने स्तर पर उदयपुर भेजने की व्यवस्था की। उदयपुर पहुंचाने पर गायत्री परिवार उदयपुर के परिजनों ने उन्हें खाना खिलाकर ट्रैन से कोटा तक पहुंचाया। कोटा पहुँचने पर दिया कोटा के भाइयों ने खाना खिलाकर कर उनके विश्राम की व्यवस्था की। अगली सुबह उन सभी मज़दूरों को खाना खिलाया एवं एक टवेरा गाड़ी किराए पर कर मध्यप्रदेश सीमा कस्बा थाना तक पहुंचाने। आगे की यात्रा के लिए भी वहां के गायत्री परिजनों से संपर्क कर आगे गन्तव्य तक पहुँचाने में दिया के भाइयों ने व्यवस्था की। इस मदद में दिया प्रबंधन वाहिनी के मुकेश प्रजापति, ललित सोनी,अरविन्द राठौर,प्रज्ञेश यादव, मधुसूदन शर्मा ने आपसी संपर्क कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

hemraj

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