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तकनीकी रूप में पिछड़ा हुआ है मुकुन्दरा
बाघों की मॉनिटरिंग में ड्रोन कैमरे का नही किया इस्तेमाल
ई-सर्विलांस तकनीकी में पिछड़ा, अनुभव स्टाफ की कमी
कोटा.
हाडौती के वन्यजीव प्रेमी मुकुन्दरा को प्रदेश के नंबर-1 टाइगर रिज़र्व के रूप में सपने संजोए हुए है, लेकिन ऐसा होना असंभव है। क्योंकि, मुकुन्दरा टाइगर रिज़र्व में अन्य रिज़र्व की अपेक्षा तकनीकी रूप से पिछड़ा हुआ है। यूं तो टाइगर रिज़र्व में बाघों की मोनिटरिंग के लिए ड्रोन कैमरा है, लेकिन इसका कभी यूज़ नही लिया। एकाध बार इसको प्रयोग के तौर पर काम में लिया था। उसके बाद कभी इसकी खबर नही ली। जबकि, टाइगर रिज़र्व में बाघिन एमटी-4 की साइटिंग नही हो रही है। इसको उपयोग में लिया जाता तो काफी कुछ मदद मिल सकती थी। यहां तक एमटी-2 बाघिन और शावक को समय पर तलाशा जा सकता था। इसी तरह ई-सर्विलांस तकनीकी में काफी पिछड़ा हुआ है। इसका भी प्रॉपर तरीके से उपयोग नही हो रहा। एम स्ट्रिप सॉफ्टवेयर के भी बुरे हाल है। आधे अधिक वनकर्मियों ने इसको इनस्टॉल भी नही किया। जबकि, वन्यजीवों की मॉनिटरिंग के लिए इसका उपयोग जरूरी है।
अनुभवी ट्रेकरों की खलती कमी
टाइगर रिज़र्व में बाघों की मॉनिटरिंग के लिए अनुभवी स्टाफ की कमी है। रणथंभौर टाइगर रिज़र्व की बात करे तो वहां पर यहां से बेहतर ट्रैकर है। वहां पर 70 से अधिक बाघ होने के बावजूद हर बाघ की ट्रैकिंग हो जाती है। जबकि, मुकुन्दरा में अपर्याप्त बाघ होने के बावजूद ट्रैकिंग नही हो पा रही। स्थिति यह है कि एक बाघिन काफी दिनों तक ट्रैक नही कर पाए। इससे पूर्व भी ऐसी स्थिति लगातार सामने आ रही थी।
एडवाइजरी कमेटी से नही तालमेल
मुकुन्दरा में पर्यटन, बाघों की देखरेख और भविष्य के प्लान के लिए लोकल एडवाइजर कमेटी गठित की गई है, लेकिन अधिकारियों और कमेटी के सदस्यों के बीच तालमेल नही है। कमेटी की बैठक बुलाएं तो महीने हो गए। सबसे गौर करने वाली बात तो यह है कि इस कमेटी में एक भी वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट नही है। हालांकि, वन्यजीव प्रेमी तो है।
विवादित अधिकारियों की नियुक्ति
एमटी-2 की मौत के बाद मुकुन्दरा के अधिकारियों पर गाज गिरी है। उनके स्थान पर दूसरे अधिकारी लगाए है, लेकिन इनमें भी विवादित अधिकारी बताएं जा रहे है। बाघ मित्र संस्था के बृजेश विजयवर्गीय का कहना है कि यहां पर उन अधिकारियों को लगाया है, जिनके खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। सरिस्का में भी विवादित कार्यकाल रहा था। ऐसे में अनुभवी और लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित करने वाले अधिकारियों को नियुक्त करना चाहिए।
ऐसे तो कैसे रखे पक्ष
मुकुन्दरा टाइगर रिज़र्व में फील्ड डायरेक्टर पद पर सेडूराम राम यादव को नियुक्त किया है, लेकिन उनको अपना पक्ष जानने के लिए कई बार फ़ोन किया, लेकिन उन्होंने फ़ोन रिसीव नही किया। ऐसे में अधिकारियों का पक्ष कैसे रखे।
इनका कहना है।
मुकुन्दरा तकनीकी रूप में काफी पिछड़ा हुआ है। अनुभवी स्टाफ की कमी है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

इस मामले में फील्ड डायरेक्टर से बात करे। अभी व्यस्त है। बाद में कॉल कर लेंगे।
बीजो जॉय, उपवन संरक्षक, मुकुन्दरा टाइगर रिज़र्व

hemraj

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