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कोटा.

कवि लेखिका डॉ.कंचना सक्सेना की पुस्तक सिविक सेंस का विमोचन राजकीय महाविद्यालय कोटा में प्राचार्य डॉ.आर .एम.कुरैशी , सहायक निदेशक आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान जयपुर डॉ.के.एम.गवेन्द्रा , साहित्यकार डॉ शशि प्रकाश चौधरी , एक आई फुट्टो के क्षेत्रीय महासचिव डॉ .रघुराज सिंह परिहार ने विमोचन किया । यह पुस्तक हमारे नागरिक धर्म को संबोधित करते हुए कविताओं का एक संग्रह है जिसमें समय समय पर मनुष्य होने की उपस्थिति व एक नागरिक के रूप में हमारी क्या चिंता है इस बात को जाहिर किया गया है । पुस्तक का लोकार्पण करते हुए डॉ.के.एम. गवेन्द्रा ने कहा कि आज सबसे ज्यादा अपने नागरिक धर्म को पहचानने की जरूरत है । यदि हम सब एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्म व कर्त्तव्य वोध को करते रहते हैं तो समाज में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती । इस अवसर पर स्वयं लेखिका ने अपनी रचना प्रक्रिया व पुस्तक पर बात करते हुए कहा कि मेरे लिए लिखना एक तरह से मनुष्यता की खोज है । सिविक सेंस इसी खोज की आत्म गुहार है । सिविक सेंस में आना मेरी नज़र में मनुष्य होने की पहली शर्त है ‌। इस अवसर पर साहित्यकार डॉ शशि प्रकाश चौधरी ने बताया कि जैसे जैसे मशीनीकरण और बाजार के हम शिकार होते जा रहे हैं वैसे वैसे हमारे लिए स्वतः सिविक सेंस की जरूरत बढ़ती जा रही है । प्राचार्य डॉ आर.एम.कुरैशी व डॉ. रघुराज सिंह परिहार ने लेखिका डॉ.कंचना सक्सेना के साहित्यिक यात्रा को रेखांकित करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की बधाई व शुभकामनाएं दी ।

कोरोना समय में पुस्तक का सादा विमोचन विचार की दुनिया में एक स्वागत योग्य कदम है । इस तरह की पुस्तकें आती रहनी चाहिए ।
hemraj

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