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चंबल घड़ियाल में आबाद होंगे घड़ियाल 
 नेस्टिंग के लिए तार फेसिंग के भेजे प्रस्ताव
इस साल पाली घाट के पास करवाई थी फेंसिंग
कोटा
दुनियाभर में लुप्त हो रहे घड़ियालों की संरक्षण स्थली अब चंबल में बनेगी। इनको फिर से आबाद करने का काम चंबल घड़िय्Þााल अभयारण्य विभाग करेगा।  विभाग द्वारा इनकी नेस्टिंग वाले क्षेत्र में तार फेंसिंग करवाई जाएगी। इसके लिए विभाग ने हाल ही में प्रस्ताव भेजे है। प्रस्तावों में विभाग के अधिकारियों ने इनकी नेस्टिंग क्षेत्र में तार फेंसिंग करवाने के लिए कहा है, ताकि घड़ियाल आराम से प्रजनन कर सके। क्योंकि, हर साल चंबल के तटों पर हजारों की संख्या में घड़ियाल अंडे तो देते है, लेकिन मानवीय दखल तथा अन्य कारणों से नष्ट हो जाते है। प्रस्तावों से पूर्व घड़ियाल विभाग के अधिकारियों ने पाली घाट के पास फेसिंग करवाई थी। यहां पर 23 में से 23 नेस्ट सुरक्षित बच गए। जबकि, इससे  पहले बिना फेसिंग के आधे से अधिक घड़ियालों के नेस्ट खराब हो गए। विभाग  के अधिकारियों द्वारा किए गए सफलतम प्रयोग के बाद ही अधिकारियों ने इस संदर्भ में प्रस्ताव लिए है। चंबल घड़ियाल सेंचुरी विभाग द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए प्रस्तावों पर इंप्लीमेंट होता है तो हजारों की संख्या में घड़ियाल बचाए जा सकेंगे। 
फेंसिंग से ऐसे सुरक्षित होंगे अंडे
घड़ियाल शर्मिले स्वभाव का जलीय जीव है। मानवीय दखल से दूर रहना पसंद करता है। इसके अलावा सियार, श्वान तथा अन्य जीवों से घड़ियाल के अंडों को खतरा रहता है। घड़ियाल स्वच्छ तथा बजरी में अंडे देना पसंद करते है। बजरी खनन से भी खासा नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में तार फेसिंग इनकी सुरक्षा का बेहतर उपाय है। फेसिंग से भेड़िया, श्वान, जंगली बिल्ली तथा अन्य वन्यजीव प्रवेश नहीं कर पाएंगे। इससे उनके अंडों को खतरा नहीं होगा। फेसिंग के अलावा विभाग ने बजट भी मांगा है।
संरक्षण से बढ़ी तादाद   
चंबल घड़ियाल अभयारण्य राजस्थान से मध्यप्रदेश तक 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस साल की गई गणना में इनकी संख्या 1859 दर्ज की गई थी। जबकि, इससे पूर्व 1876 थी। संख्या कम होने कारण इस साल बाढ़ के कारण अन्य नदियों में चले गए है। साथ ही एक नेस्ट की गणना इसमें शामिल नहीं है। राजस्थान स्थित चंबल नदी में इनकी संख्या 850 के आस-पास है।  एक हजार से अधिक घड़ियाल मध्य प्रदेश स्थित चंबल नदी में है। बताया जा रहा है कि 80 प्रतिशत घड़ियाल चंबल नदी में पाए जाते है। केवल 20 प्रतिशत  अन्य नदियों में मिलते है। चंबल में घड़ियालों की बढ़ रही संख्या से वन्यजीव विभाग के अच्छी खबर है। क्योंकि, विश्वभर में प्रदूषण तथा मानवीय कारकों से घड़ियाल विलुप्त होने के कगार पर है। यहां पर मध्यप्रदेश तथा राजस्थान द्वारा इनका संरक्षण किए जाने से इनकी संख्या में वृद्धि हुई है। जानकार बताते है कि चंबल के अलावा कुछ संख्या में घड़ियाल यमुना तथा पार्वती नदी में भी है, लेकिन यहां पर चंबल नदी के आस-पास वाले क्षेत्रों में है।
दुनिया से लुप्त हो रहे घड़ियाल
दुनियाभर की नदियों में प्रदूषण और खनन बढ़ा है। इस कारण घड़ियाल लुप्त होने की कगार पर है। अंतरराष्टÑीय प्रकृति संरक्षण संघ ने घड़ियालों को लुप्त जीवों की श्रेणी में रखा गया है। ये शेड्यूल-1 का जीव है। रेड डाटा बुक में भी इसको शामिल किया है। लगातार घट रही संख्या के कारण वन्यजीव विभाग द्वारा इनका संरक्षण किया जा रहा है। हालांकि, अभी भी इनके संरक्षण में काफी खतरा है। क्योंकि, नदियों में लगातार बजरी की निकासी हो रही है। इस कारण इनको नेस्टिंग में दिक्कत हो रही है। सियार, कुत्ते तथा अन्य जानवरों से भी इनके अंडों को खासा नुकसान हो रहा है। फिर भी विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों से इनकी संख्या में इजाफा हुआ है।
इनका कहना है
चंबल घड़ियाल सेंचुरी विभाग ने घडियालों को संरचण देने के लिए इस बार तार फेसिंग लगाकर अच्छा काम किया है। इसका नतीजा यह हुआ कि नेस्टिंग  अच्छी हुई। सभी की हैचिंग हो चुकी है।
 हरिमोहन मीना, घड़ियाल एक्सपर्ट,
 
इस बार तार फेसिंग से घड़ियालों के अंडों को नुकसान नहीं हुआ है। यह प्रयोग सफल होने से इसके लिए प्रस्ताव भेजे है। इस प्रक्रिया से घड़ियालों का संरक्षण होगा।
फुरकान अली, उपवन संरक्षक, चंबल घडियाल सेंचुरी विभाग
 
 
hemraj

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