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एमटी-3 की मौत के बाद भी  नही लिया सबक

 मुकुन्दरा टाइगर रिजर्व में एक और बाघिन की मौत
बेवडा तलाई के पास मृत मिली बाघिन एमटी-2, एक शावक लापता
सूचना पर पहुंचे आलाधिकारी, लोक सभा अध्यक्ष एनटीसीए से करवाएंगे जांच
कोटा
मुकुन्दरा टाइगर रिजÞर्व में बाघ एमटी-3 की मौत का मामला शांत भी नही हुआ था। इससे पहले 12 दिन के अंतर में बाघिन एमटी-2 की भी मौत हो गई। बाघिन की मौत में अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि बाघिन की मौत दो तीन दिन पूर्व हो चुकी थी। साथ ही बाघिन के दो शावकों में से एक शावक अभी भी गायब है। जबकि, एक शावक वनकर्मियों को मिल चुका है। हैरानी की बात तो यह रही कि तीन चार दिन से बाघिन और शावक दिखाई नही दिए इसके बाद भी विभाग के अधिकारियों ने इनको तलाश नही किया। रेडियो कॉलर की एक जगह लोकेशन आने से सभी निश्चिंत हो गए। सुबह बेवडा तलाई के पास बाघिन मृत अवस्था में मिली तो पूरे प्रदेश भर में हडकंप मच गया। सूचना पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरमिंदम तोमर भी जयपुर से मौके पर पहुंचे। इसके बाद शव को दरा स्थित सर्किट हाउस में लाने के प्रयास किए जाते रहे, लेकिन दुर्गम जंगल होने से शव को लाया नहीं जा सका। बाद में मौके पर जाकर मुकंदरा टाइगर रिजर्व के डॉक्टर तेजेंद्र रियाड, बहुउद्देशिय पशु चिकित्सालय डॉ एके पांडे और एक अन्य डॉक्टर ने पोस्टमार्टम कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद वनाधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन के शव का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार कर दिया।
48 घंटे पुराना था शव
अधिकारियों की लापरवाही इतनी थी कि समय पर बाघिन की मौत का पता भी नहीं लगा सके। शव करीब 48 घंटे से अधिक पुराना हो चुका था। क्षत विक्षिप्त शव होने के कारण इसको सर्किट हाउस नही लाया जा सका। पूरा शरीर बदबू मारने लगा था। लोग गंध के कारण पास भी नहीं पहुंच सके थे। ऐसे में डॉक्टर्स की टीम ने सभी को वहां से भेज दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि बाघिन की मौत संक्रमण से हुई है। संक्रमण पूरे शरीर में फैल चुका था। कोई अज्ञात बीमारी होने का अंदेशा भी बता रहे है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा होगा। इसके लिए शव के सैंपल भी लिए है। कोरोना भी जांच होगी। इसके भी सैंपल कलेक्ट किए है। सैंपल बरेली लैब में भेजे जाएंगे।
12 दिन में दो बाघों की मौत
प्रदेश भर में मुकंदरा टाइगर रिजर्व में 12 दिनों में दो बाघों का संभवतया- पहला मामला है। इससे पहले इतने कम समय में बाघों की मौत हुई है। टाइगर रिजर्व में 23 जुलाई को भी युवा बाघ एमटी-3 की मौत हो चुकी है। इसकी मौत के कारणों का अभी तक खुलासा भी नहीं हुआ। इससे पूर्व दूसरे बाघ की मौत होना  बड़ा सवाल है। साथ टाइगर रिजर्व विभाग के अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। क्योंकि, अधिकारियों बाघ एमटी-3 की भी प्रोपर मॉनिटरिंग की। समय रहते उसकी बीमारी का पता लगाया जाता तो उससे बचाया जा सकता था। लापरवाही तो इतनी रही कि जवान बाघ की मौत के बाद भी अधिकारी बेफिक्र रहे।
बाघिन को नहीं किया तलाश
बताया जा रहा है कि बाघिन पिछले चार दिनों से गायब थी। इसकी साइटिंग नहीं हो रही थी। हालांकि, रेडियो कॉलर से एक जगह पर लोकेशन मिल रही थी। इतने दिनों के बाद भी बाघिन नजर नहीं आने पर भी अधिकारियों और वनकर्मियों ने इसको तलाश नहीं किया। जबकि, बाघिन के साथ-साथ दो शावक भी थे। ऐसे में हर समय मॉनिटरिंग की जानी थी, लेकिन लापरवाह अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। इसमें रेंजर की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। क्योंकि, रेंजर ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी। ऐसा भी सुनने में आया कि रेंजर ड्यूटी से अक्सर नदारद रहते थे। पिछले दिनों बाघ की मौत के दिन भी रेंजर अवकाश पर थे। सूचना मिलने के बाद भी कार्यालय में नहीं पहुंचे थे। ऐसे में अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही हैै।
जवाब देने से बचते रहे अधिकारी
टाइगर रिजर्व में बाघिन की मौत के बाद अधिकारी मामले को दबाने के फिराक में रहे। यहां तक सभी अधिकारियों ने फोन बंद कर लिए। मीडियाकर्मियों के सवालों से भी बचते रहे। जबकि, जयपुर से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरमिंदम तोमर, हेड आॅफ फॉरेस्ट जीवी रेड्डी और मुकंदरा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आनंद मोहन मौके पर पहुंच गए थे। बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी मौके पर पहुंचने पर अधिकारी उनके सवालों से बचने के लिए जंगल में चले गए। इसके बाद कार्यालय से बाहर नहीं निकले।
पूर्व विधायक ने सुनाई खरी खोटी
बाघिन की मौत की खबर के बाद बड़ी संख्या में लोग दरा स्थित सर्किट हाउस पहुंच गए। इस दौरान भाजपा के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने अधिकारियों कोे जमकर खरी खोटी सुनाई। साथ ही कांग्रेस सरकार पर भी कटाक्ष किए। राजावत का कहना था कि भाजपा सरकार ने हाड़ौती को डेवलप करने के लिए इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे अधिकारी प्रोजेक्ट में लगा दिए, जिनको अनुभव नहीं है। अधिकारी ज्यादा समय कोटा में व्यस्त रहते है। ऐसे में लापरवाह अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए। साथ ही बाघों की मौत का उच्च स्तरीय कमेटी से जांच होनी चाहिए।
बड़ी संख्या में पहुंचे वन्यजीव प्रेमी
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में वन्यजीव प्रेमी मुकंदरा पहुंच गए। मुकंदरा एडवाइजरी कमेटी के सदस्य निखलेश सेठी, एएच जैदी, डॉ सुधीर गुप्ता, बृजेश यदुवंशी, बनवारी यदुवंशी और उर्वशी शर्मा ने मौके पर पहुंच अधिकारियों ने घटना का जायजा लिया। उन्होंन उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की। पगमार्क फाउंडेशन के संयोजक देवव्रत सिंह हाड़ा ने सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखकर सीबीआई से जांच करवाने की मांग की गई। इसके बाद वन्यजीव प्रेमियों ने बाघिन को नम आंखों से विदाई दी।
ड्रोन से नहीं की मॉनीटरिंग
टाइगर रिजर्व में बाघों और वन्यजीवों की प्रोपर मॉनिटरिंग के लिए उच्च गुणवता युक्त कैमरे लगा रखे है। इसके अलावा जंगल में सैकड़ों फोटो टेÑप कैमरे है। हर 6 घंटे में रेडियो कॉलर के माध्यम से बाघ की मॉनिटरिंग होती है। इसके बाद भी जिम्मेदारियों ने जिम्मेदारी नहीं निभाई। यहां तक बाघों की मॉनिटरिंग के लिए ड्रोन कैमरा भी ले आए थे, लेकिन कैमरे से एक दिन भी मॉनिटरिंग की। इसके लिए अधिकारियों से बात की तो सही जवाब नहीं दे पाए। साथ ही ई-सर्विसलाइंस सिस्टम भ्ी इजाद किया था, लेकिन इसका भी कोई मतलब नहीं रहा। क्योंकि, वनकर्मियों ने इसको मोबाइल में इंस्टाल तो कर लिया, लेकिन कभी उपयोग में नहीं लिया।
यूडीएच मंत्री से चर्चा के बाद जांच के निर्देश
स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल नें एक बाघ और बाघिन की हुई मौत मामले की जांच करवाने एंव लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के लिए वन मंत्री सुखराम विश्नोई से बात की है। स्वायत्त शासन मंत्री ने बताया कि बाघिन की मौत की सूचना मिलते ही वन मंत्री से बात की और वन मंत्री ने भी बाघिन की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करवाने और बाघों के सरंक्षण में कोई कोताही सामने आने पर कडी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व व पर्यटन विकास के लिए हमने इसको नेशनल पार्क का दर्जा दिलाया था। आगे भी मुकुन्दरा टाइगर रिवर्ज में बाघों के संरक्षण और अन्य संभावनाओं पर सरकार के सकारात्मक प्रयास रहेंगे।
शावकों को होगी दिक्कत
बाघिन की मौत के हार्ड एनक्लोजर में दो शावक बचे है। अब उनको काफी दिक्कत होगी। क्योंकि, शावकों की आयु मुश्किल से 5 से 6 माह की होगी। बाघिन के दूध पर ही जिवित थे। बाघिन की मौत के बाद उनको सुरक्षित रखने का जिम्मा बड़ा चुनौतीपूर्ण होगा। एक्सपर्ट का कहना है कि बाघिन की मौत के बाद कम उम्र के शावकों को बड़ा करना मुश्किल काम होता है। हालांकि, वनकर्मी एक शावक को कृत्रिम तरीके से दूध पीला रहे है। जबकि, एक दूसरा बाघ अभी तक नहीं मिलर है। वनकर्मियों द्वारा उसको तलाशा जा रहा है।
प्रोजेक्ट में पड़ गई रार
मुकंदरा में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए यहां पर टाइगर प्रोजेक्ट शुरू किया था, लेकिन कम दिनों में दो बाघों की मौत के बाद प्रोजेक्ट में रार पड़ गई है। यहां पर दो बाघ लाए जाने थे। उनको लाने पर भी विराम लग गया है। साथ ही  इन बाघों को अन्य जगह भी शिफ्ट किया जा सकता है। क्योंकि, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन आॅथोरिटी(एनटीसीए) के अधिकारी भी बाघिन की मौत के बाद भी मौके पर पहुंच गए थे। सरकार भी इसकी जांच करवा रही है। जांच में यहां की जलवायु बाघों के लिए अनुकूल साबित नहीं होती तो बाघों यहां से हटाया जा सकता है। ऐसा होता है तो मुकंदरा के भविष्य में विराम लग जाएंगे। प्रोजेक्ट पूरी तरह से शुरू होने के पहले खत्म हो जाएगा। हालांकि, ये सब जांच के बाद होगा।
दशकों पीछे चला गया मुकंदरा
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघ बसाए जाने के बाद यहां के दिन फिरने लगे थे। यहां पर होटल इंडस्ट्रीज अभी से फल फूलने लगी थी। लोगों ने इस क्षेत्र में जमीन खरीद ली थी। ट्यूरिज्म को लेकर यहां का भविष्य उज्ज्वल था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। जानकारों का कहना है कि मुकंदरा टाइगर रिजर्व अब दशकों साल पीछे चला गया है। यहां पर टाइगर प्रोजेक्ट शुरू भी रहता है तो इसको रनिंग में आने पर सालों लग जाएंगे। कोटा में कोचिंग के मुकंदरा ही महत्वपूर्ण हब था। इसमें भी बाघों की मौत के बाद भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे है।
नूर की बेटी एमटी-2 बाघिन
बाघिन एमटी-2 को रणथंभौर टाइगर रिजर्व में से 18 दिसंबर 2018 को मुकंदरा में रीलिज किया गया था। यह रणथंभौर के प्रसिद्ध बाघिन नूर टी-39 की बेटी थी। 107 सुलताना की बहिन थी। मुकंदरा में आने से पूर्व इसको टी-106 के नाम से जाना जाता था। एमटी-1 का घर बसाने के लिए इसे यहां पर छोड़ा गया था। हालांकि, बाघिन से दो शावक तो पैदा हुए। इनके कुनबे का विस्तार होने से पूर्व बाघिन के रूप में झटका लग गया।
मौत पर कौन क्या बोल
दो बाघों का मरना पीड़ा पहुंचाने वाला है। बाघिन ने दो शावकों को जन्म दिया था। ऐसे में सतर्कता बरतनी चाहिए। बाघों की मौत से पर्यटन की संभावनाएं प्रभावित होगी। दिल्ली पहुंचकर एनटीसीए से समीक्षा करवाएंगे।
ओम बिरला, लोक सभा अध्यक्ष

बाघिन की मौत दु:खद है। इसको लेकर वनमंत्री से बात की। उन्होंने जांच के आदेश दिए है। दोषी कार्मिकों पर कार्रवाई की जाएगी।
शांति धारीवाल, यूडीएच मंत्री

घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचकर जानकारी करवा रहा हूं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट हो पाएगा। दोषी कार्मिकों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अरमिंदम तोमर, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक,

hemraj

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