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इनसाइड स्टोरी…
एमटी-3 को देख लगा नहीं, बीमार था बा
अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के समक्ष रखा पक्ष
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत का मामला
कोटा
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में गुरूवार को बाघ एमटी-3 की मौत के बाद उच्चाधिकारियों ने टाइगर रिजर्व के रिपोर्ट मांगी है। साथ ही फोन पर भी जानकारी मांगी है। इसके जवाब में मुकंदरा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा है। रिजर्व के अधिकारियों का कहना था कि तीन-चार दिन से बाघ जरूर थोडा सा लंगडाकर चल रहा था, लेकिन ऐसा कभी भी लगा नहीं मामला गंभीर है। क्योंकि, बाघों में ऐसा पहले भी हो चुका है। एकाध दिन बाद स्वत: ठीक हो जाते है। साथ ही 22 जुलाई शाम 6 बजकर साथ मिनट पर इसको घाटी जागीर के पास बैठा देखा था। इसका फोटो कैमरे में टेÑप भी हुआ था, तब भी ऐसा लगा नहीं कि बाघ बीमार है। अधिकारियों का कहना था कि   वनकर्मी इतने एक्सपर्ट तो होते नहीं कि शरीर के अंदर किसी प्रकार की चोट होने का आभास कर ले। इसका आभास तो एक्सपर्ट डॉक्टर ही पता कर सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों को जानकारी नहीं दी। हालांकि, मुकंदरा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को इसकी जानकारी उपलब्ध करवा दी थी। स्वयं ने आकर इसकी मॉनिटरिंग की थी। बाघ को देखकर कभी ऐसा लगा नहीं कि यह बीमार था। ऐसा भी प्रतीत नहीं हुआ कि इसके शरीर में किसी प्रकार की तकलीफ है। इसने नीलगाय तक शिकार किया था।
बाघों का टीका लगाने की मांग
टाइगर रिजर्व में कार्डियक अटैक और लंग्स में संक्रमण से बाघ की मौत के बाद टाइगर एक्सपर्ट सभी बाघों का टीका लगाने की मांग कर रहे है। एक्सपर्ट का कहना है कि बाघों की मौत पूर्व में भी कार्डियक अटैक और संक्रमण से हो चुकी है। इनको भी इंसानों की तरह टीके लगाए जाने की जरूरत है। एक्सपर्ट का कहना है कि टीका लगाए जाने से वायरल, बैक्टिरिया, संक्रमण और पोलियों समेत अन्य बीमारियों से बच सकते है। अन्य देशों में भी बाघों को टीका लगाए जाते है। यहां भी लगाए जाने की जरूरत है, ताकि ऐसी बीमारियों से उनको बचाया जा सकेगा।
नए बाघ लाने की करे तैयारी
एमटी-3 की मौत के बाद एमटी-4 बाघिन अकेली पड़ गई है। ऐसे में वन्यजीव प्रेमी अब नए बाघ लाने की मांग करने लगे है। लोकल एडवाइजरी कमेटी के एएच जैदी, तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव प्रेमी बनवारी यदुवंशी समेत अन्य का कहना है कि बाघ का असमय चले जाना बड़ा सदमा है, लेकिन अब इसको भूलकर मुकुंदरा की प्रगति की सोचनी चाहिए। इसी रंज में बैठे रहने से नए कार्यो  में विराम लग जाएगा। ऐसे में इनको भूलकर नए बाघ लाने की तैयारी करनी चाहिए। कुछ लोग इसको पर्यटन के लिए भी खोलने की मांग कर रहे है।
इधर, 104 भैंसों के 52 हजार वसूले
बाघ की मौत के बाद वनकर्मी पूरे मूड में आ गए है। वनकर्मियों ने शुक्रवार को चरवाहों पर कार्रवाई की है। अधिकारियों ने बताया कि टाइगर रिजर्व में चरवाहों ने भैंसे प्रवेश करवा दी थी। पूर्व में उनको चेतावनी दी थी। इसके बाद भी नहीं मान रहे थे। ऐसे में कार्रवाई की है। उनसे 104 भैंसों के 52 हजार रुपए वसूले है। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद भी टाइगर रिजर्व में भैंसें मिलती है तो दोगुनी दर पर पैसा वसूला जाएगा।

इनका कहना है।
कार्डियक अटैक और संक्रमण से पूर्व में भी बाघों की मौत हो चुकी है। इसके लिए बाघों को बचपन में टीका लगाया जाना चाहिए, ताकि सामान्य बीमारियों से बचा जा सके।
डॉ कृष्णेंद्र सिंह नामा, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

बाघ 22 जुलाई शाम को घाटी जागीर के पास आराम से बैठा था। इसको देखकर कभी लगा नहीं कि यह बीमार था। फिर भी जांच रिपोर्ट में खुलासा हो जाएगा। उच्चाधिकारियों को पूरी जानकारी दे दी गई है।

 डॉ टीमोहन रात, उपवन संरक्षक, मुकंदरा टाइगर रिजर्व, कोटा

hemraj

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