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अजब प्रेम की गजब कहानी:
प्यार को पाने के लिए 150 किमी दूर पहुंचा बाघ
बाघिन एमटी-2 की तलाश में एमटी-3 आया था मुकंदरा
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक साथ करते थे विचरण
कोटा
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में पिछले दिनों बाघ एमटी-3 की मौत हो गई। मौत के बाद इस बाघ की यादें मात्र रह गई है। प्रदेश के सबसे खूबसूरत बाघों में से एक था। यह कोई साधारण बाघ नहीं था। साधारण बाघ इसलिए नहीं कि खूबरसूरत था बल्कि इसकी मोहब्बत के कारण सदियों तक जाना जाएगा।
एमटी-3 बाघ और एमटी-2 बाघिन के बीच में गहरा प्रेम था। बाघिन की चाहत ही बाघ को 150 किलोमीटर दूर मुकंदरा टाइगर रिजर्व में खींच कर ले आई। प्यार को पाने के लिए चंबल की कराईयों को चीरते हुए यहां चला आया, लेकिन यहां भी प्यार हासिल नहीं हो सका। क्योंकि, एमटी-2 बाघिन 82 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निर्मित हार्ड एनक्लोजर में विचरण करती थी। जबकि, एमटी-3 खुले क्षेत्र में घूम रहा था। इनके बीच में तारों की दीवारें थी। अक्सर मिलने की चाहत में कई बार एनक्लोजर को क्ष्तिग्रस्त कर दिया था, लेकिन मिलने में नाकामयाब रहा।
दोनों बाघ और बाघिन रणथंभौर टाइगर रिजर्व के जोन-2 में साथ विचरण करते थे। रणथंभौर में बाघों पर स्टडी करने वाले नेचुरल गाइड शाकिर अली बताते है कि एमटी-3 को रणथंभौर में टी-98 के नाम से जानते थे। जबकि, एमटी-2 का नाम रणथंभौर में टी-106 के नाम से था। दोनों के बीच बचपन से गहरी दोस्ती थी। दोनों की उम्र में भी ज्यादा अंतर नहीं था। यहां तक टी-106 का परिवार और टी-98 का परिवार भी साथ घूमता रहता था। इनका पसंदीदा एरिया जोन नंबर-2 था। टी-98 के साथ भाई टी-97, बहिन टी-99 और मां टी-60 भी इसी जोन में थी।
एनक्लोजर के पास देख चौक गए अधिकारी
रणथंभौर में जन्मा टी-98 अचानक गायब हो जाता है। फिर 150 किलामीटर का सफर तय कर मुकंदरा पहुंच जाता है। यहां भी बार-बार एनक्लोजर को तोड़ बाघिन के पास जाने की कोशिश करता है। ये सब अजीबों गरीब था। अधिकारी बाघ के इस व्यवहार को देखकर हैरान थे। बाद में इसका पिछला रिकार्ड खंगाला तो पता चला कि यह रणथंभौर में एमटी-2 बाघिन का साथी था। इसकी तलाश में चंबल, कालीसिंध जैसी बड़ी नदियों को पार करते हुए मुकंदरा पहुंचा था। अचानक बाघिन को रणथंभौर से लाए जाने के बाद यह दु:खी हो गया था। बाघिन को वहां से लाने के बाद रणथंभौर से गायब हो गया। फिर वहां से निकलकर काफी दिन बूंदी रुका। फिर कुछ दिन बाद सीधा मुकुंदरा में बाघिन के पास देखा गया।
ऐसा पहली बार हुआ
मुकंदरा टाइगर रिजर्व में इसके आ जाने से हर कोई हैरान था। हैरानी कारण यह था कि एक बाघ बाघिन को पाने के लिए 150 किलोमीटर का सफर कर इतनी दूर आ सकता है। इतना तो पता था कि यह बाघिन एमटी-2 से प्रेम करता था, लेकिन यह पता नहीं था। यहां आने के बाद भी करीब डेढ़ साल से घूमता रहा। बदकिस्मती यह रही कि इसके आने से पूर्व अधिकारियों ने बाघिन एमटी-2 के साथ बाघ एमटी-1 का जोड़ा बना दिया। दोनों अंदर पिंजरे में थे। जबकि, यह बाहर घूमता रहा।
इनका कहना है।
मुकंदरा में ले लाने से पूर्व एमटी-2 और एमटी-3 रणथंभौर के जोन 2 में साथ पले बडेÞ हुए थे। दोनों के बीच गहरी मोहब्बत थी। बाघिन को रणथंभौर से ले जाने के बाद इसका मन लगा नहीं। ये यहां से गायब हो गया।
शाकिर अली, नेचुरल गाइड, रणथंभौर टाइगर रिजर्व

एमटी-3 को अक्सर एनक्लोजर के पास विचरण करते हुए देखते थे। काफी बार इसने एनक्लोजर की दीवार तोड़ने की कोशिश की। इसका यह व्यवहार अजीब था।
डॉ टीमोहन राज, उपवन संरक्षक, मुकंदरा टाइगर रिजर्व, कोटा,

hemraj

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