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कोरोना ने बदली जिंदगी:
ग्रैजुएट से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट कर रहे मनरेगा में काम
– तलाई निर्माण और अन्य कार्यों में रिकॉर्ड मजदूरों की बढ़ोतरी
कुंजेड.
कोरोना कोविड- 19 के चलते लोगों की जिंदगी बदल गई है। शहरों में लोगों के व्यवसाय छीन जाने से गांवों कि ओर लौट आएं है। यहां पर भी रोजगार के संसाधन है। ऐसे में लोगों ने मनरेगा को चुना है। मनरेगा की स्थिति यह है कि यहां पर ग्रैजुएट से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट युवक भी काम करते नजर आते है। पहली बार मनरेगा में श्रमिकों की रिकॉर्ड वृध्दि दर्ज की गई है। अकेले ग्राम पंचायत क्षेत्र में पांच मस्टरोल संचालित है। इन मस्टरोल में करीब पांच सौ श्रमिक काम करते है। इनमें अधिकांश श्रमिक तो शहरों से पलायन कर गांवों की ओर लौटने वाले है। शुरुआत में श्रमिक खाली हाथ बैठे रहे। बाद में मनरेगा के तहत काम संचालित होने से श्रमिकों ने आवेदन कर काम पा लिया।
अब नही लौटेंगे शहर
व्यवसाय ठप्प होने से गांवों में लौटे श्रमिकों का कहना है कि अब वापस शहर नही जाएंगे। उनका कहना था कि सैकडों किलोमीटर पैदल चलकर बड़ी मुश्किल से गांव आए है। वहां पर अब हालात खराब हो रहे है। ऐसे में वहां लौटना सही नही है। हालांकि, गांवों में भी पर्याप्त रोजगार नही है। फिर भी मनरेगा के माध्यम से खर्च चल रहा है। श्रमिक नरेश कुमार भील, रामदयाल सुमन, मुकेश कुमार समेत अन्य का कहना है कि कोरोना को देखते हुए सरकार को 12 माह मनरेगा के माध्यम से रोजगार देना चाहिए। उधर, सरपंच राजेश पाटनी का कहना है कि श्रमिकों को मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। अपनी मांग के अनुसार श्रमिक भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केंद्र में नाम दर्ज करवा सकते है।

hemraj

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